मनोविज्ञान और हम
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Tuesday, September 13, 2016
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हिन्दी कविता
पाषाण (कविता )
"पाषाण (कविता )"
एक थी खूबसूरत सी लड़की,
सब से नाराज़, बेजार ,
उखड़ी -उखड़ी , थोड़ी कटी-कटी.
पूछा , तब उसने बताया –
तलाकशुदा हैं ,
इसलिये कुछ उसे उपलब्ध मानते हैं.
कुछ चुभने वाली बातें करते हैं.
किसी ने कहा – इन बातों से भागो मत.
जवाब दो , सामना करो.
अगली बार छेड़े जाने पर उसने ,
पलट कर कहा – हाँ, अकेली हूँ.
पर क्या तुम पत्थर हो ? पाषाण हो
क्या तुम्हारे घर की लड़कियों के साथ ,
ऐसा नहीँ हो सकता ?
मदद नही कर सकते हो , ना करो.
पर अपमानित तो मत करो.
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हिन्दी कविता
वह कौन है?
"वह कौन है? ( कविता )"
वह कौन थी?
जिन्दगी में उलझी-उलझी
सब कुछ सुलझाने की कोशिश में,
बहुत कुछ झेलती हुई
जिन्दगी के सैकङो रंगों से खेलती हुई
खङी
कुछ परेशान, कुछ हताश,
फिर भी हँसती सी।
वह कौन है?
??????
नारी
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life- poetry जिंदगी -कविता
"life- poetry जिंदगी -कविता"
The philosophy of life and sea waves are similar.
They return , whatever is give to them.
जिंदगी अौर सागर की लहरें
एक सी लगती हैं।
जो दो
कभी ना कभी वापस
लौटाती हैं जरुर।
जिंदगी अौर सागर का फ़लसफा
शायद एक है।
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दिल – कविता
"दिल – कविता"
कुछ लोग बड़ी बड़ी
बातें करते हैं.
पर किसी का “दिल न दुखाना”,
सीखने में बड़ा वक्त
लगा देते हैं.
और
जब अपने पर आता हैं ,
तब उन्हें , अपना दुख ही सबसे
बड़ा नज़र आता हैं.
इस लिये , कहते हैं……
किसी का दिल ना दुखाना
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वक्त -कविता
"वक्त -कविता "
कभी तो.थोड़ा थम जा
ऐ वक्त
साँस लेने दे.
ज़रा सुस्ताने दे.
घड़ी की ये सूईया भी
भागी जा रही हैं
बिना पैरों ,
अपनी दो हाथों के सहारे.
कब मुट्ठी के रेत की
तरह तुम फिसल गये वक्त.
पता ही नहीँ चला.
वह तो आईना था.
जिसने तुम्हारी चुगली कर दी.
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