साँसे बचाए रखना
सागर पार से कितनी आवाज़ें दीं-
इंतज़ार करना…..
साँसे बचाए रखना .
शमा जलाए रखना ,
आस बनाए रखना .
गहराई और अथाह जल…….
लहरों का सैलाब ,
सागर में ज़्यादा था
या
आँखों से बहते
आँसुओं के लहरों में.
कुछ समझ नहीं आया .
बहते दर्द के सैलाब से धुँधली आँखें
कुछ देख नहीं पाई.
और इंतज़ार बस इंतज़ार रह गया …….

बहुत सुंदर प्रस्तुति।
ReplyDeleteमेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
iwillrocknow.com
उम्दा रचना
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